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महाविद्यालय का लक्ष्य :

  • अध्यनरत छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु पर्याप्त अवसर देना !
  • चारित्रिक, शारीरिक एवं बौद्धिक विकास हेतु समुचित अवसर प्रदान करना !
  • छात्र-छात्राओं में सामाजिक संवेदनशीलता जागृत करना !
  • छात्र-छात्राओं में मानवीय गुणों का विकास करना !
  • समाज के लिए एक आदर्श नागरिक तैयार करना !

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In Front Of Ghanteshwari Mandir, NH-53, Main Road, Saraipali Distt-Mahasamund(C.G.)
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Dr. Amrit Lal Patel
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Lt. Raja Virendra Bahadur Singh- Biography

फुलझर क्षेत्र प्राचीनकाल से अपने अनेक विशिष्टताओं के लिए उल्लेखनीय रहा है ! यह वनांचल अपने सहजता और सरलता के साथ ही समृद्ध लोकजीवन के कारण विशिष्ट रहा है !इसी फुलझर अंचल की हृदयस्थली सरायपाली में 21 दिसम्बर 1925 को राजा लाल बहादुर सिंह की पत्नी श्रीमती गायत्री देवी के गर्भ से दो युगल कुमारों का जन्म हुआ, जिनमे कुमार वीरेंद्र बहादुर सिंह बड़े थे आपकी प्रारंभिक शिक्षा राजकुमार कॉलेज रायपुर में सन 1937 से 1944 तक हुई तथा सर जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट्स मुंबई से दो वर्ष का संगीत प्रशिक्षण पाया, जिसमे कुमार गंधर्व के सहपाठी रहे! वे एक कुशल कलाकार, दक्ष चित्रकार एवं फ़ुटबाल के प्रसिद्ध खिलाड़ी रहे! सन 1951 में राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह का राज तिलक हुआ !

         राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह याने बड़े महाराज के विशिष्ट गुणों के कारण सम्पूर्ण फुलझर क्षेत्र इनके प्रति स्नेह और सम्मान की भावना रखता है! आप अपने शांत प्रकृति, मिलनसार एवं मधुर व्यवहार के कारण सम्पूर्ण फुलझर क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय रहे हैं! इनके स्वभाव में सहजता और सरलता थी जिसके कारण आखिरी छोर का आदमी आपसे सहज ही भेंट कर लेता और अपने सुख-दुख की चर्चा किया करता था ! वे अपने राज्य के अधिकांश लोगों को व्यक्तिगत रूप से पहचानते थे! राज वैभव में पालन पोषण और राजकीय परिवेश में विकास होने के बावजूद वे एक परमस्नेहि, अभिन्नमित्र एवं आत्मीय जान के रूप में जन सामान्य से घुले मिले थे!इनकी दानशीलता के कारण जनश्रुति में फुलझर के रतिदेव की संज्ञा दी जाती है !इनका व्यक्तित्व आकर्षक था तथा विलक्षण स्मरण शक्ति के धनी थे ! ईश्वर के प्रति अटूट आस्था थी और घंटो रामायण का पाठ करना इनको प्रिय था !वे स्वयं हारमोनियम वादन करते हुए मानस गान करते थे तथा उनके छोटे भाई महेंद्र बहादुर सिंह तबले पर संगत करते थे ! उनकी मधुर ध्वनि एवं गायन सुनने के लिए अपार जान समूह उमड़ पड़ता था ! स्थापना के लिए गणेश की मूर्ति भी बनाते थे ! आप एक उत्कृष्ट खिलाडी, मूर्तिकार, पेंटर, कार्टूनिस्ट, वाद्य-संगीत में निपुण, रामायण एवं भजन गायक थे !आपने 1953-54 में राजनीति में प्रवेश किया ! 1957 में बसना से तथा 1977 में पुनः बसना से विधायक निर्वाचित हुए ! अपने राजनीतिक जीवन में अनेक समितियों एवं संगठनो के अध्यक्ष, संरक्षक एवं परामर्शदाता रहे! पिछड़े वर्गों को शोषित वर्गो से छुटकारा दिलाना इनका मुख्य ध्येय रहा ! वे संत राजनीतिज्ञ के रुप में जाने जाते हैं ! जीवनपर्यन्त आदिवासियों के छत्तीसगढ़ स्तरीय सम्माननीय प्रेरणादाता थे ! इनका निधन 19.12.1982 को हृदयघात से हुआ ! इस तरहमन से कलाकार तन से खिलाडी और कर्म से अनथक जनसेवी वीरेंद्र बहादुर सिंह वास्तव में फुलझर क्षेत्र के ह्रदय-सम्राट थे! उनके नाम पर फुलझर महाविद्यालय का नामकरण स्व.राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय सरायपाली , जिला-महासमुंद रखा गया है! महाविद्यालय के प्रतिक चिन्ह का प्रारूप स्वयं राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह ने तैयार किया था! बड़े महाराज के रूप में प्रसिद्ध फुलझर क्षेत्र के ह्रदय सम्राट राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह को राज्य-आडंबर पराजित नहीं कर सका ! राजनीति उन्हें भ्रष्ट नहीं कर पाई! इस प्रकार अद्भुत व्यक्तित्व के धनी राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह इस अंचल के गौरव स्तम्भ है! 

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